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चित्र कथा और वह (कहानी संग्रह) रामनाथ शिवेंद्र

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  ‘ चित्र-कथा और वह ’   कहानी संग्रह प्रस्तावना  ‘ चित्रकथा और वह ’ कहानी संग्रह की कहानियॉ पिछले आठ - दस वर्षों से लगातार मेरा पीछा करती रही हैं , पीछा ही करतीं तब भी गनीमत थी पर वे तो मुझे फटकारने तथा दुतकारने की सीमा तक जा पहुंचती थीं , मजा यह कि मैं नहीं समझ पाता था कि मेरे साथ मेरी ही रचित कहानियॉ दुर्व्यवहार क्यों कर रही हैं , मुझे ही फटकार रही हैं ... । ऐसा तो नहीं होना चाहिए , सृजन के सर्जक को फटकारें , यह नैतिक नहीं है। हॉ आलोचक , समीक्षक फटकारते तो बात दूसरी थी। शब्दों की अदालत में खड़ा करने का उन्हें पूरा पूरा हक है , उनके हक को दुनिया का कोई भी रचनाकार , कलमकार ललकार नहीं सकता। मैं तो अबदना सा कलमकार भला मेरी जुर्रत कि उनसे कुछ बोल सकूं , नहीं , नहीं ऐसा कत्तई संभव नहीं। मेरी ही कानियॉ मुझे फटकारती रहीं और में ओबरा की पहाड़ियों की तरह लगातार टूटता रहा , विखंडित होता रहा। अब देखिए नऽ , संग्रह की पहली कहानी ‘...