डफली बजाए जा कहानी संग्रह ki kahaniyan
dafli bajaye jaa हम तुम्हें खोना नहीं चाहते कामरेड ‘जयकरन पाडे़ को छोड़कर तुमने अच्छा नहीं किया कामरेड ! सेक्रेटरिएट की बैठक में क्या जबाब दिया जाएगा ?‘ कहते हुए चुप हो गए थे कॉमरेड दŸा , और सतीश का चेहरा बुझ सा गया था , हां गलती तो हो गई है पर करता क्या ? वह बेचारी औरत पैर पर गिर पड़ी थी, ‘भईया‘, ‘भईया ‘ कह कर देह से लिपट गई थी, सामने पेड़ में बंधा था उसका पति , उसके ससुर को मार ही दिया गया था, पूरी बखरी धंू-धूं कर जल रही थी, सामने दो-दो लाशें झुकी गर्दनें, पेड़ में लटकी हुई, गोलियों से छलनी हुआ सीना, हमारा लक्ष्य पूरा हो गया था, केवल जयकरन ही तो छूट गया....... क्या फर्क पड़ जाएगा इससे ?‘ कामरेड सतीश आगे कुछ नहीं बोल पाया, एक अंतहीन उदासी में लीन हो गया, कामरेड सतीश का जबाब अच्छा नहीं लगा कामरेड़ प्रभुदŸा को , पर होता भी क्या ? जयकरन को तो छोड़ ही दिया गया था, वर्ग -दुश्मन सफाया अभियान के लिए भविष्य में घातक हो सकता था जयकरन, इतिहास की वैज्ञानिक व्याखांए भी अवांक्षनीय के विनाश और वांक्षनीय की प्राप्ति की पक्षधर हैं, बुद्धि और बल सभी स्तर पर, बहुत ही संकटपूर्ण स्थिति थी...